भारत का स्वतंत्रता दिवस बधाई हो ! मैं सन् 2006 में भारतीय दोस्त के साथ स्वतंत्र दिवस मनाने तोक्यो के भारतीय दूतावास गई हूँ।
इधर जापान में भी 15 अगस्त तो विशेष दिवस है। सन् 1945 के इसी दिन, हार से हापान के लिए द्वितीय विश्व युद्ध खतम हो गया। 15 अगस्त हमरे लिए युद्ध के डर, दुख याद करके, फिर कभी नहीं लड़ने का निश्चय करने का दिन है।
विश्व युद्ध के काफ़ी बाद मेरा जनम हुआ था। फ़िर भी ऐसा कहा सकती हूँ ... हम अंतिम पीढ़ी हैं जिसे युद्ध के अहसास होता है। मेरे पिता जी लड़ाई गए। मेरी सहेली के पिताजी को हिरोशिमा में बमबरी हो गया। और मेरे बचपन में कभी कभी आहत सैनिक देखा। जैसा कोइ मेला, ज़्यादा लोग शहर में आने के दिन, आहत सैनिक ... युद्ध में बाह या पाँव खोए लोग, ज़मीन पर बैठे हुए थे। शायद युद्ध खतम होने के बाद तब करीब 25 साल हो गए हो। फिर भी लोगों के लिए युद्ध के याद तब तक साफ़ था और ऐसा लोग भी कम नहीं होगा कि अपने परिवार युद्ध में खो गय। इसलिए अधिकतर लोग आहर सिपाहियों को पैसा देते थे। अपनी मंमी से भी बार बार यद्ध की बात सुना। मंमी की सहेलियाँ हर महीने एक पुस्तिका प्रकासित क रते हैं। अब PC से सब कुछ आसानी से बना सकने के बावजूद, वे लोग साहस के साथ, हस्त्लिखित पुस्तिका बनाते हैं। हमेशा उस पुसतिका 4 पन्ने की है, लेकिन हर साल के अगस्त के अंक, खासकर 24 पन्ने हिस्सा लेते हैं। युद्ध की बात लिखने के लिए। ऐसा अगली पीढ़ी को युद्ध की बात सुनाने की कोशिश करते हैं। युद्ध दुख है, कोई अच्छाई नहीं है ... यह समाझाने की कोशिश तनमन से करते हैं।
और 15 अगस्ते के आसपास जापान में ओबोन का नाम जापानी बौध तयोहार है। कहा जाता है कि ओबोन में स्वर्गवासी पूर्वाज हमें मिलने के लिए इस दुनिया वापस आते हैं। हम सपरिवार पूर्वाज स्वागत करने के लिए अपने देश वापस जाते हैं और इसके लिए अधिकतर जापानी कंपनियों में 15 अगस्त के आसपास छुटठियाँ देते हैं।
द्वितीय विश्व युद्ध खतम होकर 65 साल बीत गए। इस युद्ध जाननेवाले भी कम हो रहे हैं। लेकिन हम जापानी, कभी भूल नहीं सकते। सदा के लिए याद रखना चाहिए। युद्ध दुख है। अपने प्यारे लोग भी मर जाता है। कोई अच्छाई नहीं है। कभी नहीं लड़ाई करना।
Showing posts with label दैनिक बात. Show all posts
Showing posts with label दैनिक बात. Show all posts
15 August 2010
25 July 2010
भूमि पूजन
एक सवेरे हमरे घर से रास्ते के पार के ज़मीन पर भूमि पूजन करते देखा।
जापान में मकान या इमारत बनवाने से पहले, उस स्थल पर अनुष्ठान किया जाता है कि ज़मीन के भगवान को उस निर्माण कार्य की सुरक्षा और खैर मनाने के लिए। पूजन में कम से कम 3 लोग हिस्सा लेना चाहिए। मकानवाला, ठीकेदार और पूजा करते याजक ( पुजारी) ।
हमारे घर फ़्लैट के आठ वीं मंजिल में है। वहाँ से खींचने से फ़ोटो इतना साफ़ नहीं ।
बायाँ छातावाली महीला, शायद मकानवाला ( यजमान ) है। दायाँ खड़ा होते आदमी, वह ठीकेदार होगा। और बीच का किमोनोवोला, वह पूजारी है।
भूमि पूजन करने में 4 कोने में हरा बाँस खड़ा करके धान के पयाल से बने पवित्र रस्से बाँस के चार कोने को बाँधकर चौकार घेरा बनाते हैं। बाँस और धान के पयाल से बने घेरा पवित्र स्थान ( ज्ञमंडल ) मनाकर, अनुष्ठान स्थल हो जाता है। वहाँ पर एक मेज़ रखते हैं और उस पर शराब, पानी चावल, नमक, सब्जी, वैसा भोज लगाकर भूमि पूजन करते हैँ।
जापानी मकान लकड़ी और कागज़ से बना है। आगे लकड़ी बिठाने में भी और एक रस्म होगी। पूजन, रस्म, सब ताइआन...मंगल दिन में किया जाता है।
21 July 2010
कंडील मेला
पिछ्ले रविवार तक लगभग 2 महीने, हम रोज़ ढोल, बँसुरी बजने का आवाज़ से जगाए जाते थे। रोज़ सवेरे 5 बजे से ढोल और बँसुरी के आवाज़ सुनाई दे रहा था। 18 तरीख को त्योहार ख़तम होकर आवाज़ भी ख़तम हो गय। जूलाइ, अगस्त,गर्मी मौसम में, पूरे जापान के इधर उधर में त्योहार आयोजित किया जाता है।
यहाँ हमारे कुकि शहर (तोक्यो से करीब 50 km दूर पर) में हर साल जुलाई के 12 और 18 तरीख को चोचिन् मात्सुरि का नाम त्योहार आयोजित किया जाता है।
चोचिन्, कागज़ की कंडील है। 400-500 कंडील से सजाए रथ, शहर में धीरे धीरे निकालते हैं। कुकि शहर के सब से पुराने 7 इलाके के पास हर रथ है, और रात को एक जगह सब रथ इकट्ठा होकर अपने का सुन्दरता या बजाते ढाल, बाँसुरी की कारीगरी दिखाते हैं। आजकल का त्योहार अधिकतर छुट्ठी में चलाते है। लेकिन यह कंडील मेला हर साल एक ही दिन, जुलाइ के 12 और 18 तरीख को ही अयोजित किया जाता है, अगर उन दोनों दिन छुट्टी नहीं होने के बा वजूद। सुना है कि शिंतो धर्म, जापानी भगवान को अच्छी फ़स्ल मिलने को और मुसीबत दूर करने को प्रर्थना करने का त्योहार है।
रथ की बात करूँ तो आगमी शनिवार, 24 तरीख को, जापान में भी भगवान श्री जगन्नाथ के "रथ यात्र " आयोजित किया जाएगा। काई साल पहले से जापानवासी उड़िसी लोग रथ बनवाकर त्योहार चलाते हैं। मैं भी 2 साल पहले देखने गई। पूजा में नारियाल के टुकड़ा मिल। इस साल रथ यात्र योकोहामा में आयोजित किया जाएगा।
यहाँ हमारे कुकि शहर (तोक्यो से करीब 50 km दूर पर) में हर साल जुलाई के 12 और 18 तरीख को चोचिन् मात्सुरि का नाम त्योहार आयोजित किया जाता है।
चोचिन्, कागज़ की कंडील है। 400-500 कंडील से सजाए रथ, शहर में धीरे धीरे निकालते हैं। कुकि शहर के सब से पुराने 7 इलाके के पास हर रथ है, और रात को एक जगह सब रथ इकट्ठा होकर अपने का सुन्दरता या बजाते ढाल, बाँसुरी की कारीगरी दिखाते हैं। आजकल का त्योहार अधिकतर छुट्ठी में चलाते है। लेकिन यह कंडील मेला हर साल एक ही दिन, जुलाइ के 12 और 18 तरीख को ही अयोजित किया जाता है, अगर उन दोनों दिन छुट्टी नहीं होने के बा वजूद। सुना है कि शिंतो धर्म, जापानी भगवान को अच्छी फ़स्ल मिलने को और मुसीबत दूर करने को प्रर्थना करने का त्योहार है।
त्योहार का टी शार्ट
रथ की बात करूँ तो आगमी शनिवार, 24 तरीख को, जापान में भी भगवान श्री जगन्नाथ के "रथ यात्र " आयोजित किया जाएगा। काई साल पहले से जापानवासी उड़िसी लोग रथ बनवाकर त्योहार चलाते हैं। मैं भी 2 साल पहले देखने गई। पूजा में नारियाल के टुकड़ा मिल। इस साल रथ यात्र योकोहामा में आयोजित किया जाएगा।
04 July 2010
तनहा धन्यवाद
एक दिन ज़ेब्रा क्रोसिंग पर एक विदेशी आदमी से संबोधित की गई थी । लाल बत्ती नीला रंग बदरने को इंतज़ार करते करते उस से हल्की बात करती थी।
'आप कहाँ जा रही हैं?'
'स्टेशान।'
'मैं भी आप के साथ स्टेशान जा सकता हूँ?'
'हाँ! क्यों नहीं?'
हम स्टेशान पहुँचे, तब उसने कहा।
'मुझ से बात करने के लिए धन्यवाद।'
मुझे यह सुनकर तनहा लगा...। 'बात करने के लिए धन्यवाद।' ?अब तक दूसरे जापानी ने उससे बात नहीं किया ?
अधिकतर जापनियों को अंग्रेज़ी नहीं आती है, इसलिए विदेशी से बार करने को डरते हैं, ऐसा जापानी भी होते होंगे, लेकिन उसी आदमी, मुझ से जापानी में बात करते थे।
और दूसरे दिन, रेल गाड़ी में एक जापानी आदमी, फर्श पर बैठते थे। वह मुझ से बुढ़े थे, इसलिए मैंने खड़ा होकर उसे अपने सीट दिया...और पता चला वह नशे में थे।
'बेहनो, शूक्रिया। तुम कहाँ जाओगी ?'
'मैं ....तक जाऊँगी।'
मैं ....तक जाऊँगा। उस स्टेशान तक यहाँ से कितने स्टेशान होंगे?।
'काई स्टेशान... गाड़ी पहुँचने से पहले, मैं आप को बताऊँगी। '
सवेरे था, पर वह नशे में होने से काफ़ी गडबड़ बात कहते थे। तब बच्चा लेते जवान मंमी आई। उस का बच्चा छोटा था। वह बुढ़े आदमी, उस मम्मी को अपने सीट देने के लिए खड़ा हुअ था। नशे से लडखड़ाने लगा। उसी गाड़ी के दूसरे काई पैसिंजर की खिल्ली की सुनाई दी।
मम्मी ने कहा,
'हम अगले स्टेशान पर उतर जाएँगे। आप बैटे रहिए।'
और उस मम्मी, बच्चा, अगले स्टेशान पर उतरकर चले गए।
उस के बाद, उस आदमी के स्टेशान तक हम बात की।
'सुनिए, आप का स्टेशान पहूँचवाले हैं।'
'अच्छा, बेहनो, शूक्रिया। यह लेना।'
उसने ऐसा कहाकर जीब से नोट निकला।
'नहीं, नहीं ....'
फिर तनहा लगा। उस आदमी किस के लिए पैसा देने चाहते थे? बात करने के लिए?
जापान कब से ऐसा देशा हो गया, बात करने के लिए धन्यवाद या पैसा देने का विचार उठने का।
'आप कहाँ जा रही हैं?'
'स्टेशान।'
'मैं भी आप के साथ स्टेशान जा सकता हूँ?'
'हाँ! क्यों नहीं?'
हम स्टेशान पहुँचे, तब उसने कहा।
'मुझ से बात करने के लिए धन्यवाद।'
मुझे यह सुनकर तनहा लगा...। 'बात करने के लिए धन्यवाद।' ?अब तक दूसरे जापानी ने उससे बात नहीं किया ?
अधिकतर जापनियों को अंग्रेज़ी नहीं आती है, इसलिए विदेशी से बार करने को डरते हैं, ऐसा जापानी भी होते होंगे, लेकिन उसी आदमी, मुझ से जापानी में बात करते थे।
और दूसरे दिन, रेल गाड़ी में एक जापानी आदमी, फर्श पर बैठते थे। वह मुझ से बुढ़े थे, इसलिए मैंने खड़ा होकर उसे अपने सीट दिया...और पता चला वह नशे में थे।
'बेहनो, शूक्रिया। तुम कहाँ जाओगी ?'
'मैं ....तक जाऊँगी।'
मैं ....तक जाऊँगा। उस स्टेशान तक यहाँ से कितने स्टेशान होंगे?।
'काई स्टेशान... गाड़ी पहुँचने से पहले, मैं आप को बताऊँगी। '
सवेरे था, पर वह नशे में होने से काफ़ी गडबड़ बात कहते थे। तब बच्चा लेते जवान मंमी आई। उस का बच्चा छोटा था। वह बुढ़े आदमी, उस मम्मी को अपने सीट देने के लिए खड़ा हुअ था। नशे से लडखड़ाने लगा। उसी गाड़ी के दूसरे काई पैसिंजर की खिल्ली की सुनाई दी।
मम्मी ने कहा,
'हम अगले स्टेशान पर उतर जाएँगे। आप बैटे रहिए।'
और उस मम्मी, बच्चा, अगले स्टेशान पर उतरकर चले गए।
उस के बाद, उस आदमी के स्टेशान तक हम बात की।
'सुनिए, आप का स्टेशान पहूँचवाले हैं।'
'अच्छा, बेहनो, शूक्रिया। यह लेना।'
उसने ऐसा कहाकर जीब से नोट निकला।
'नहीं, नहीं ....'
फिर तनहा लगा। उस आदमी किस के लिए पैसा देने चाहते थे? बात करने के लिए?
जापान कब से ऐसा देशा हो गया, बात करने के लिए धन्यवाद या पैसा देने का विचार उठने का।
01 July 2010
अगेहा तितली
पिछले साल एक दोस्त से ' संशो ' ... तेजफल क पेड़ मिला।
उस पत्ते के ख़ास अपना सुगंध और स्वाद है।
एक पत्ते सजाने से सब्जी काफ़ी अच्छी हो जाती है। हम भी वसंत में नए नए तेजफल के पत्ते कभी कभी खाते थे।
अब पत्ते सख़त होकर खाने के लिए अच्छा नहीं हो गया।
हमरे किए स्वादिष्ट अच्छा नहीं होने के बावजूद, अगेहा का नाम तितलियों को तेजफल के पत्ते बहुत पसंद है।
एक दिन तेजफल के पेड़ में दो इल्लियाँ देख लीं। अगेहा तितली की इल्ली, शुरू में काली है...पक्षी की बीट की शकल-सूरत दिखावा करती है ताकि पक्षी से नखाई जाएँ। हरे पत्ते खाते खाते इल्ली भी हरी हो जाती है।


हमरा परिवार का कुल चिह्न अगेहा तितली है।
सालों पहले दूसरी प्रकार तित्ली की इल्ली भी हमरे फ़्लैट के पर्स्ले पत्ते खाकर तितली बन गई। इस समय भी इल्ली से तितली बनने का दिन की प्रतीक्षा करते रोज़ इल्ली देखते थे। हमारा तेजफल दो इल्लियाँ पत्ते खाने के लिए छोटा है, ऐसा सोचकर मैनंने एक इल्ली बाहर छोड़ दी।
दो तीन दिन से इल्ली हरी रंग हो गई। शायद आज या कल प्यूपा हो जाएगी ... फ़िर तितली।
उस समय का रास्ता देखते देखते, आज काई बार तेजफल देखती थी। लाँच के बाद तो ज़ररूर तेज फल के पेड़ पर थी। लेकिन शाम को फिर देखी तो गायब हो गई। कहाँ गई ? पक्षी से खाई गई क्या ?
उस पत्ते के ख़ास अपना सुगंध और स्वाद है।
एक पत्ते सजाने से सब्जी काफ़ी अच्छी हो जाती है। हम भी वसंत में नए नए तेजफल के पत्ते कभी कभी खाते थे।
करीर, बाँस क नया कल्ला और तेजफलका पत्ता
अब पत्ते सख़त होकर खाने के लिए अच्छा नहीं हो गया।
हमरे किए स्वादिष्ट अच्छा नहीं होने के बावजूद, अगेहा का नाम तितलियों को तेजफल के पत्ते बहुत पसंद है।
एक दिन तेजफल के पेड़ में दो इल्लियाँ देख लीं। अगेहा तितली की इल्ली, शुरू में काली है...पक्षी की बीट की शकल-सूरत दिखावा करती है ताकि पक्षी से नखाई जाएँ। हरे पत्ते खाते खाते इल्ली भी हरी हो जाती है।


हमरा परिवार का कुल चिह्न अगेहा तितली है।
सालों पहले दूसरी प्रकार तित्ली की इल्ली भी हमरे फ़्लैट के पर्स्ले पत्ते खाकर तितली बन गई। इस समय भी इल्ली से तितली बनने का दिन की प्रतीक्षा करते रोज़ इल्ली देखते थे। हमारा तेजफल दो इल्लियाँ पत्ते खाने के लिए छोटा है, ऐसा सोचकर मैनंने एक इल्ली बाहर छोड़ दी।
दो तीन दिन से इल्ली हरी रंग हो गई। शायद आज या कल प्यूपा हो जाएगी ... फ़िर तितली।
उस समय का रास्ता देखते देखते, आज काई बार तेजफल देखती थी। लाँच के बाद तो ज़ररूर तेज फल के पेड़ पर थी। लेकिन शाम को फिर देखी तो गायब हो गई। कहाँ गई ? पक्षी से खाई गई क्या ?
15 June 2010
तीन टाँग का कौआ
अब दक्षिण अफ्रीका में FIFA (फ़ेडरेशान इंटरनेशनेल डी फुटबॉल एसेसिएशन) वार्ल्ड कप चल रहा है। फुटबॉल जापान में बेसबॉल के बाद सब से दूसरे लोकप्रिय खेल है। 2002 के वार्ल्ड कप, जापान और दक्षिण कोरिया, दोनों देशों के मज़बानी से आयोजित किया गया है।
कल जापान कैमेरून से मैच खेलकर जीत गया। कैमेरून, फिफा में उन्नीसवाँ स्थान है, और जापान पैंतालीसवाँ का है। इसलिए सारे जापान में आज तक उल्लास भरा है।
खैर, JFA, ज़ापान फुटबॉल एसोसिएशन का चिह्न यातागारासु... देतकथा का बड़ा कौआ है, जिस के तीन टाँग हैं। कहा जाता है कि यह यातागारासु, भगवान के संदेशवाहक की रूप में, काम्मु सम्राट, जो स्वर्ग से इस दुनिया आकर, जापान का पहला सम्राट हो गए, उन का सेना को चलने का रास्ता बताया।
सुना है, ऐसा तीन टाँग की पक्षी, जापान में ही नहीं, दूसरे काई देशों के मिथक में होते हैं। और अधिकतर ऐसी पक्षी सूरज का अवतार है। जापान में भी तीन टाँग का कौआ, ज़रूर पवित्र पक्षी है, और सेना को रासता बताने के अर्थ में, खेल टीम का प्रतीक के लिए बिल्कुल उचित होगा।
लेकिन JFA खासकर इस का मतलब में वह चिह्न को अपनाता है....यातागारासु के तीन टाँग हैं, दो टाँगवाले से अच्छी तरह फुटबॉल क्यों नहीं खेलता ? इस पन्ने के निचला भाग देखिए।
मुझे JFA का यह सेंस बहुत पसंद है।
कल जापान कैमेरून से मैच खेलकर जीत गया। कैमेरून, फिफा में उन्नीसवाँ स्थान है, और जापान पैंतालीसवाँ का है। इसलिए सारे जापान में आज तक उल्लास भरा है।
खैर, JFA, ज़ापान फुटबॉल एसोसिएशन का चिह्न यातागारासु... देतकथा का बड़ा कौआ है, जिस के तीन टाँग हैं। कहा जाता है कि यह यातागारासु, भगवान के संदेशवाहक की रूप में, काम्मु सम्राट, जो स्वर्ग से इस दुनिया आकर, जापान का पहला सम्राट हो गए, उन का सेना को चलने का रास्ता बताया।
सुना है, ऐसा तीन टाँग की पक्षी, जापान में ही नहीं, दूसरे काई देशों के मिथक में होते हैं। और अधिकतर ऐसी पक्षी सूरज का अवतार है। जापान में भी तीन टाँग का कौआ, ज़रूर पवित्र पक्षी है, और सेना को रासता बताने के अर्थ में, खेल टीम का प्रतीक के लिए बिल्कुल उचित होगा।
लेकिन JFA खासकर इस का मतलब में वह चिह्न को अपनाता है....यातागारासु के तीन टाँग हैं, दो टाँगवाले से अच्छी तरह फुटबॉल क्यों नहीं खेलता ? इस पन्ने के निचला भाग देखिए।
मुझे JFA का यह सेंस बहुत पसंद है।
14 June 2010
औजार के प्रति लगाव
कल जापान के वैज्ञानिक उपग्रह, क्षुद्रघह अंवेषी, हायाबुसा 7 सालों के बाद अंतरिक्ष से वापस आया। सालों अनेक काम करके आखिर वायुमंडल में आकर जल गया। इस हायबुसा को भूरि प्रशांसा करते आवाज़ जापान में भरा था। ज़रूर हम काफी समझते हैं कि यह महा काम हायाबुसा प्रोजेक्ट टीम से पूर्ति की गई है। फ़िर भी किसी तरह, लगता है कि हायाबुसा जैसा वीर है जो सारा बदन घायल होने पर तनमन से काम पुउरा करके, काम के मारे मर गया।
हायाबुसा ही नहीं, हमें ऐसा कभी कभी औजार के प्रति प्यार लगता है। गुडिया छोड़ने के समय भी पूजा करके पवित्र आगे से जलाते हैं, सिलाई की सूई भी साल में एक दिन, तोफ़ु (सोयबीन से बने पनीर ) में रखकर धन्यवाद देते हैं।
हमरे घर की वाशिंग मशीन 15 सालों से ज़्यादा, रिफ़्रिजरेटर 11 साल पहले से रोज काम करते आए हैं, मेरे महात्वपूर्ण सहयोगी हैं। लंबा समय साथ साथ रहने से औजार भी दोस्त हो जाता है।
हायाबुसा के बारे में यह कार्यक्रम, 18 जून तक सुन सकते हैं।
हायाबुसा ही नहीं, हमें ऐसा कभी कभी औजार के प्रति प्यार लगता है। गुडिया छोड़ने के समय भी पूजा करके पवित्र आगे से जलाते हैं, सिलाई की सूई भी साल में एक दिन, तोफ़ु (सोयबीन से बने पनीर ) में रखकर धन्यवाद देते हैं।
हमरे घर की वाशिंग मशीन 15 सालों से ज़्यादा, रिफ़्रिजरेटर 11 साल पहले से रोज काम करते आए हैं, मेरे महात्वपूर्ण सहयोगी हैं। लंबा समय साथ साथ रहने से औजार भी दोस्त हो जाता है।
हायाबुसा के बारे में यह कार्यक्रम, 18 जून तक सुन सकते हैं।
12 June 2010
शादी के लिए अच्छा दिन
आज शनिवार, 12 जून है। फ़िर ताइअन... जापानी पंचांग में मंगल दिन है। शायद सारे जापान के जहाँ-जहाँ में शादी हुई होगी। शनिवार और रविवार, जापान के अधिकतर कॉपनी में छुट्ठी है, और मंगल दिन।
पुराने जापान में जून तो शादी समय नहीं था। जापान में वसंत... मार्च से माई, या शरद...सितंबर से नवंबर साल में सब से सुखद मौसम हैं। जून से जुलाई बरसात के लिए मौसम इतना अच्छा नहीं है...उमस भरा है। लेकिन आजकल "जून ब्राइड सुखी हो जाती है ।" ... ऐसा कहाकर जून में शादी होनेवाले पहले से ज़्यादा हो गए।
जापान में शादी अपने धर्म के अनुसार आयोजित की जाती है। हमरी शादी, 21 साल पहले शिंतो (जापानी भगवान धर्म) की शैली से हुई।
जापानी भगवान के सामने सदा के लिए एक दूसरे से प्यार करने का संकल्त करके, प्रसाद (शराब) लिए।
संकल्त

जापान में भी मंगल रंग लाल है, लेकिन विवाह संस्कार में वधू सफ़ेद किमोनो पहनती है। सफ़ेद पवित्र रंग है, और किसी रंग भी साफ साफ लगा सकते हैं.....मतलब वधू को ससराल शैली की आदी होना।
जापान में शादी करना तो पिता जी की जिम्मेदारी ही नहीं है। जैसे हम, दंपति खुद अपनी शादी करना भी आम की बात है। इसलिए आजकल दोनों के नया जीवन शुरु करने में खर्च कम करने के लिए, विवाह संस्कार न करने वर-वधी भी ज़्यादा हो रहे हैं।
09 May 2010
किमोनो मेला
हर साल, गोल्डन वीक में हम मेरे मैक जाते हैं। मेरा मैका नीगाता प्रिफेक्चार के तोओकामाचि है। वहाँ शीत ऋतु में बहुत ज़्यादा बरफ़ पड़ता है। बरफ़ ढेर लगाने से मकान का पहली मंजिल आसानी से बरफ़ से पट जाता है। इसलिए मेरे मैके का द्वार दूसरी मंजिल में है।
लेकिन माई होने के बाद, तापमान चढ़कर बरफ़ पिघल गया, अधिकतम...अब भी छाँव में कुछ बरफ़ का दिखाई देता है।खैर, तोओकामाचि का माई, साल में सब से अच्छा, सुन्दर, और सुखद ऋतु है। तरह तरह के फूल खिलते थे।
और जब हम तोओकामाचि पहुँचे, तब किमोनो मेला आयोजित किया जा रहा था।
जापान में अब किमोनो पहननेवाले बहुत कम हो गया। हम रोज़ सूट, जींज़, वैसा अंग्रेज़ी पोशाक पहेनते हैं। लेकिन उस दिन तोओकामचि के प्रमुख सड़क में बहुत ज़्यादा किमोनो (जापान की परंपरागत कपड़े) पहननेवाले की नज़र आता था। तोओकामाचि बरफ़ ही नहीं, किमोनो उद्योग (रेशमी कपड़े ) से भी मशहूर है। इसलिए किमोनो को प्रचार करने के लिए हर साल, माई के तीसरे तारीख को तोओलामचिवाले किनोमो पहनने की सिफ़ारिश करते हैं।
दो-तीन सालों पहले की तसवीर ;
इस साल इस से और ज़्यादा बरफ़ मिला।
लेकिन माई होने के बाद, तापमान चढ़कर बरफ़ पिघल गया, अधिकतम...अब भी छाँव में कुछ बरफ़ का दिखाई देता है।खैर, तोओकामाचि का माई, साल में सब से अच्छा, सुन्दर, और सुखद ऋतु है। तरह तरह के फूल खिलते थे।
और जब हम तोओकामाचि पहुँचे, तब किमोनो मेला आयोजित किया जा रहा था।
जापान में अब किमोनो पहननेवाले बहुत कम हो गया। हम रोज़ सूट, जींज़, वैसा अंग्रेज़ी पोशाक पहेनते हैं। लेकिन उस दिन तोओकामचि के प्रमुख सड़क में बहुत ज़्यादा किमोनो (जापान की परंपरागत कपड़े) पहननेवाले की नज़र आता था। तोओकामाचि बरफ़ ही नहीं, किमोनो उद्योग (रेशमी कपड़े ) से भी मशहूर है। इसलिए किमोनो को प्रचार करने के लिए हर साल, माई के तीसरे तारीख को तोओलामचिवाले किनोमो पहनने की सिफ़ारिश करते हैं।
13 April 2010
वसंत का फूल
तोक्यो में चेरी के फूल अधिकतर झड़ा है, लेकिन यहाँ साइतामा में अभी पूरा खिलते है, जहाँ मुख्य तोक्यो से 50 km उत्तरी ओर दूरी है।
चेरी के हलका पिंक, सरसों फूल की पीला, दोनों वसंत की रंग है।
चेरी के फूल मार्च से उत्तरार्ध में आते हैं। खिलने के बाद, सिर्फ़ 7-10 दिनों में ही फूल झड़ते हैं। फ़िर भी चेरी की नज़र उत्तर चढ़ते चढ़ते होक्काइदो, जापान में सब से उत्तर प्रिफ़ेक्चार ( प्रदेश ) में माई के शुरू तक पड़ती है।
कब चेरी खिलने लगेगा? पूरा खिलने का दिन कब है? उस समाचार पर हर साल हम बहुत धान रखते और चर्चा करते हैं। जापान में भी हज़ारों प्रकार के फूल होते हैं। लेकिन सिर्फ़ फूल कहें तो जापान में इस का मतलब चेरी का फूल है। ऐसा हमें चेरी से प्यार लगता है, चेरी हमारे लिए विशेष फूल है, शायद वसंत के प्रतीक की रूप में। चेरी खिलने के बाद, ठंडाई कम होते होते सुहावना मौसम हो जाता है।
चेरी के हलका पिंक, सरसों फूल की पीला, दोनों वसंत की रंग है।
तुझे देखा तो ये जाना सनम
प्यार होत है दीवाना सनम
अब यहाँ से कहाँ जाएँ हम
तेरी बाँहों में मर जाएँ हम
26 March 2010
कुत्ते का नाम, बिल्ली का नाम
जापान में "पोचि" कुत्ते के नाम के लिए सब से आम है। और अधिकतर नर कुत्ते का नाम है। पोचि का नामक इनसान कभी नहीं है।
"पड़ोसी का पोचि आया।"
यह सुनकर सब समझते हैं कि नर कुत्ता आया।
कुत्ते को इनसान का नाम भी देते हैं। औरे सफ़ेद कुत्ते को "शिरो" (सफ़ेद), काला कुत्ते को "कुरो" (काला), ऐसा नाम भी बार बार देते हैं।
बिल्ली के बारे में कहूँ तो "मिके" भी जैसा "पोचि", बिल्ली के आम का नाम है। मिके का नाम भी इनसान को कभी नहीं देते हैं। मिके का मतलब तीन रंग का बाल है। जापान में ऐसी बिल्ली है जिस के तीन रंग, सफ़ेद, काला और भूरा रंग के बाल हैं। और न जाने क्यों, ऐसी तीन रंग की बिल्ली अधिकतर मादा हैं, नर बहुत कम है। इसलिए जब मिके का नाम सुनते हैं, हम मादा बिल्ली सोचते हैं।
"तामा" भी बिल्ली के नाम की रूप में प्रसिद्ध है, लेकिन तामा का नामक इनसान भी हैं। तामा मतलब रत्न, अच्छा अर्थ है। इनसान के लिए महिलाओं का नाम है, लेकिन मादा, नर दोनों बिल्ली को तामा का नाम देते हैं।
तो पोचि का मतलब क्या है ? कहा जाता है कि "छोटा" या "कम", लेकिन पक्का पता नहीं है।
"पड़ोसी का पोचि आया।"
यह सुनकर सब समझते हैं कि नर कुत्ता आया।
कुत्ते को इनसान का नाम भी देते हैं। औरे सफ़ेद कुत्ते को "शिरो" (सफ़ेद), काला कुत्ते को "कुरो" (काला), ऐसा नाम भी बार बार देते हैं।
बिल्ली के बारे में कहूँ तो "मिके" भी जैसा "पोचि", बिल्ली के आम का नाम है। मिके का नाम भी इनसान को कभी नहीं देते हैं। मिके का मतलब तीन रंग का बाल है। जापान में ऐसी बिल्ली है जिस के तीन रंग, सफ़ेद, काला और भूरा रंग के बाल हैं। और न जाने क्यों, ऐसी तीन रंग की बिल्ली अधिकतर मादा हैं, नर बहुत कम है। इसलिए जब मिके का नाम सुनते हैं, हम मादा बिल्ली सोचते हैं।
"तामा" भी बिल्ली के नाम की रूप में प्रसिद्ध है, लेकिन तामा का नामक इनसान भी हैं। तामा मतलब रत्न, अच्छा अर्थ है। इनसान के लिए महिलाओं का नाम है, लेकिन मादा, नर दोनों बिल्ली को तामा का नाम देते हैं।
तो पोचि का मतलब क्या है ? कहा जाता है कि "छोटा" या "कम", लेकिन पक्का पता नहीं है।
07 October 2009
भगवान का मास
दूसरा ओक्टूबर को गाँधी जयंती को हिस्सा लेने के लिए भारतीय दूतावास गई, और उस का अगली दिन, तीसरा तारीख को दुर्गा पुजा गई। सुना है कि चार तारीख को डंडिया भी हुआ। और आगमी शनिवार से तोक्यो में इधर उधर, दिपावली मनाई जाएगी।

ओक्टूबर को पुरानी जापानी में, 神無月(कांना-ज़ुकि) कहते हैं। इस का मत्लब, भगवान के बिना मास/ भगवान न रहते मास। कहा जाता है कि इस महीने भर, सारा जापानी भगवान, इज़ुमो का नाम जगह (अब का शिमाने प्रिफ़ेक्चार )सब बगवान, सभा के लिए हिस्सा लेते हैं। इसलिए इज़ुमो को छोड़्कर सारे जापान में, कोई भगवान नहीं है। हाँ, इज़ुमो में बहुत भगवान हैं, इसलिए वहीं ओक्टूबर को 神在月(कामी आरि ज़ुकि)...भगवान रहते मास कहते हैं।

ओक्टूबर को पुरानी जापानी में, 神無月(कांना-ज़ुकि) कहते हैं। इस का मत्लब, भगवान के बिना मास/ भगवान न रहते मास। कहा जाता है कि इस महीने भर, सारा जापानी भगवान, इज़ुमो का नाम जगह (अब का शिमाने प्रिफ़ेक्चार )सब बगवान, सभा के लिए हिस्सा लेते हैं। इसलिए इज़ुमो को छोड़्कर सारे जापान में, कोई भगवान नहीं है। हाँ, इज़ुमो में बहुत भगवान हैं, इसलिए वहीं ओक्टूबर को 神在月(कामी आरि ज़ुकि)...भगवान रहते मास कहते हैं।
06 April 2009
29 March 2009
हिन्दी क्लास
मैं हर महीने में एक बार, हिन्दी कहनी पढ़ने जाती हूँ ।अब कृष्णा सोबती का "बादलों के घेरे " पढ़ रही हूँ।
मेरे 5 सहपठियों में, एक मुझे से युवा है, 4 बड़े हैं ... सुना है कि उन में 3 लोगों की उम्र शायद 80 से ज़्यादा हैं। सब सालों हिन्दी सीखते आए हैं , पर एक युवती (उस की आयु भी अब 40 से बड़ी हो गई) को छोड़कर हम सब हिन्दी बोल नहीं सकते!
पिछ्ले क्लास से लौटने की गाड़ी में एक सहपठी से बात की ...सालों सीखने पर हिन्दी कुछ अभ्यास बढ़ा नहीं। लेकिन न जाने क्यों, छोड़ने का विचार भी मन में कभी नहीं हुआ था।
...शायद हिन्दी पसंद है ...?
मेरे 5 सहपठियों में, एक मुझे से युवा है, 4 बड़े हैं ... सुना है कि उन में 3 लोगों की उम्र शायद 80 से ज़्यादा हैं। सब सालों हिन्दी सीखते आए हैं , पर एक युवती (उस की आयु भी अब 40 से बड़ी हो गई) को छोड़कर हम सब हिन्दी बोल नहीं सकते!
पिछ्ले क्लास से लौटने की गाड़ी में एक सहपठी से बात की ...सालों सीखने पर हिन्दी कुछ अभ्यास बढ़ा नहीं। लेकिन न जाने क्यों, छोड़ने का विचार भी मन में कभी नहीं हुआ था।
...शायद हिन्दी पसंद है ...?
Subscribe to:
Posts (Atom)















