जो भारतीय जापान में रहते हैं, वे लोगों के लिए हमेशा खाने की समस्या होती है। सिर्फ शाकाहारी ही नहीं, अधिकतर भारतीय लोग गोमांस या सूअर का गोश्त नहीं खाते हैं। लेकिन जापान में जापानी भाषा ही चलती है। अँग्रेज़ी में कुछ नहीं लिखा है। इसलिए मेरी भारतीय सहेली कई खतरनाक जापानी शब्द याद करके वे छोड़कर खाना लेती है।
उदाहरण के लिए जैसे कांजि:
肉 मांस
魚 मछ्ली
牛 गाय
豚 सूअर
鶏/鳥 मुर्गी
卵/玉子 अंडा
लेकिन ये दोनों शब्द का मतलब मांस नहीं है।
果肉 गूदा
梅肉 उमेबोशि का पेस्ट
क्या आप को उमेबोशि पता है ? उमेबोशि तो खट्टा परम का अचार है जैसा इमली।
24 November 2009
07 October 2009
भगवान का मास
दूसरा ओक्टूबर को गाँधी जयंती को हिस्सा लेने के लिए भारतीय दूतावास गई, और उस का अगली दिन, तीसरा तारीख को दुर्गा पुजा गई। सुना है कि चार तारीख को डंडिया भी हुआ। और आगमी शनिवार से तोक्यो में इधर उधर, दिपावली मनाई जाएगी।

ओक्टूबर को पुरानी जापानी में, 神無月(कांना-ज़ुकि) कहते हैं। इस का मत्लब, भगवान के बिना मास/ भगवान न रहते मास। कहा जाता है कि इस महीने भर, सारा जापानी भगवान, इज़ुमो का नाम जगह (अब का शिमाने प्रिफ़ेक्चार )सब बगवान, सभा के लिए हिस्सा लेते हैं। इसलिए इज़ुमो को छोड़्कर सारे जापान में, कोई भगवान नहीं है। हाँ, इज़ुमो में बहुत भगवान हैं, इसलिए वहीं ओक्टूबर को 神在月(कामी आरि ज़ुकि)...भगवान रहते मास कहते हैं।

ओक्टूबर को पुरानी जापानी में, 神無月(कांना-ज़ुकि) कहते हैं। इस का मत्लब, भगवान के बिना मास/ भगवान न रहते मास। कहा जाता है कि इस महीने भर, सारा जापानी भगवान, इज़ुमो का नाम जगह (अब का शिमाने प्रिफ़ेक्चार )सब बगवान, सभा के लिए हिस्सा लेते हैं। इसलिए इज़ुमो को छोड़्कर सारे जापान में, कोई भगवान नहीं है। हाँ, इज़ुमो में बहुत भगवान हैं, इसलिए वहीं ओक्टूबर को 神在月(कामी आरि ज़ुकि)...भगवान रहते मास कहते हैं।
30 September 2009
गुलदाऊदी
मेरी भारतीय सहेली को यह सुनकर हैरत हुई कि हम गुलदाऊदी की पंखुलडी खाते हैं।

हाँ, खाते हैं।
शरद का स्वाद है।
खासकर पीली और काकरेज़ी पंखुडीकी गुलदाऊदी खाने के लिए सब्जी
की रूप में बेची जाती है।
पंखुडी को गर्म पानी में उबारकर, सिरका और शोयु से खाते हैं।
थोड़ा कडुवा, पर फूल की सुगंध भी मज़ा ले सखते हैं।


हाँ, खाते हैं।
शरद का स्वाद है।
खासकर पीली और काकरेज़ी पंखुडीकी गुलदाऊदी खाने के लिए सब्जी
की रूप में बेची जाती है।
पंखुडी को गर्म पानी में उबारकर, सिरका और शोयु से खाते हैं।
थोड़ा कडुवा, पर फूल की सुगंध भी मज़ा ले सखते हैं।

29 September 2009
वर्तनी और उच्चारण
आप गाँव या पाँव कैसे बोलते हैं ?
लिपि सीधा बोलने में "gaanv" ओर "paanv"। लेकिन मेरे हिन्दी-जापानी शब्दकोश में ऐसा लिखा है कि अपवाद रूप में, "gaaoon" ओर "paaoon"।
मैंने काई भारतीय लोगों को पूचा। उन लोगों का जवाब "gaanv" ओर "paanv" था।
आप कैसे बोलते हैं ?
और एक से सुना है कि सिंह का उच्चारण शेर के लिए "sinha", लेकिन नाम के लिए "sing" ( "g" हल्का ) ।
बहुत रोचक बात है ! लेकिन सच ??
लिपि सीधा बोलने में "gaanv" ओर "paanv"। लेकिन मेरे हिन्दी-जापानी शब्दकोश में ऐसा लिखा है कि अपवाद रूप में, "gaaoon" ओर "paaoon"।
मैंने काई भारतीय लोगों को पूचा। उन लोगों का जवाब "gaanv" ओर "paanv" था।
आप कैसे बोलते हैं ?
और एक से सुना है कि सिंह का उच्चारण शेर के लिए "sinha", लेकिन नाम के लिए "sing" ( "g" हल्का ) ।
बहुत रोचक बात है ! लेकिन सच ??
फिर
पिछ्ले आधा साल पहेले से यहाँ कुछ नहीं लिखा था।
चिंताओं से मैन बेचैन थी। अब भी वे दूर नहीं चली गई। हमेशा मेरे पास हैं। लेकिन इसीलिए जपनी नहीं, दूसरी भाषा में लिख्नने की जगह जरूरी हो। काश मेरा हिम्मत फिर चिंताओं से कभी नहीं दबाया जाए।
चिंताओं से मैन बेचैन थी। अब भी वे दूर नहीं चली गई। हमेशा मेरे पास हैं। लेकिन इसीलिए जपनी नहीं, दूसरी भाषा में लिख्नने की जगह जरूरी हो। काश मेरा हिम्मत फिर चिंताओं से कभी नहीं दबाया जाए।
06 April 2009
29 March 2009
हिन्दी क्लास
मैं हर महीने में एक बार, हिन्दी कहनी पढ़ने जाती हूँ ।अब कृष्णा सोबती का "बादलों के घेरे " पढ़ रही हूँ।
मेरे 5 सहपठियों में, एक मुझे से युवा है, 4 बड़े हैं ... सुना है कि उन में 3 लोगों की उम्र शायद 80 से ज़्यादा हैं। सब सालों हिन्दी सीखते आए हैं , पर एक युवती (उस की आयु भी अब 40 से बड़ी हो गई) को छोड़कर हम सब हिन्दी बोल नहीं सकते!
पिछ्ले क्लास से लौटने की गाड़ी में एक सहपठी से बात की ...सालों सीखने पर हिन्दी कुछ अभ्यास बढ़ा नहीं। लेकिन न जाने क्यों, छोड़ने का विचार भी मन में कभी नहीं हुआ था।
...शायद हिन्दी पसंद है ...?
मेरे 5 सहपठियों में, एक मुझे से युवा है, 4 बड़े हैं ... सुना है कि उन में 3 लोगों की उम्र शायद 80 से ज़्यादा हैं। सब सालों हिन्दी सीखते आए हैं , पर एक युवती (उस की आयु भी अब 40 से बड़ी हो गई) को छोड़कर हम सब हिन्दी बोल नहीं सकते!
पिछ्ले क्लास से लौटने की गाड़ी में एक सहपठी से बात की ...सालों सीखने पर हिन्दी कुछ अभ्यास बढ़ा नहीं। लेकिन न जाने क्यों, छोड़ने का विचार भी मन में कभी नहीं हुआ था।
...शायद हिन्दी पसंद है ...?
Subscribe to:
Posts (Atom)



